देहरादून (संवाददाता) ।  उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों के चर्चित एलयूसीसी और सागा ग्रुप के 10 हजार करोड़ रुपये के चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संपत्तियां जब्त करने की कार्रवाई की। 13 से 16 अगस्त तक मुंबई और भोपाल में घोटाले के मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल और उसके करीबियों के कई आवासीय व व्यावसायिक ठिकानों पर छापेमारी हुई। कार्रवाई में ईडी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय को फ्रीज कर दिया है। ईडी की तलाशी में भारी मात्रा में घपले से जुड़े दस्तावेज और संपत्तियों का पता चला है। जांच एजेंसी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लिस्टेड शेयर, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसी और बैंक बैलेंस फ्रीज किए हैं। साथ ही नौ लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं। नकदी की बात करें तो ठिकानों से 1.53 करोड़ रुपये कैश, लगभग 35 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा और 5.25 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण व बिस्किट बरामद हुए हैं। यूपी, एमपी, उत्तराखंड सहित कई राज्यों की पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया है कि समीर अग्रवाल के सागा ग्रुप ने एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी) और अन्य सहकारी समितियों के जरिए साल 2009 से जनता को ठगना शुरू किया था। आरोपियों ने आरडी, एफडी और मासिक आय योजनाओं में निवेश पर तीन से पांच साल के भीतर रकम दोगुनी-तिगुनी करने और कार जैसे महंगे गिफ्ट देने का झूठा लालच दिया। बिना किसी वास्तविक व्यापार के महज फर्जी बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर जनता से 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। शुरुआत में निवेशकों को भरोसा जीतने के लिए कुछ भुगतान किए गए, लेकिन बाद में समीर अग्रवाल और उसके साथियों ने अधिकांश रकम अपने निजी इस्तेमाल और एजेंटों को कमीशन बांटने में उड़ा दी।
ईडी की जांच में 50 से अधिक शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पाया गया कि जनता से ज्यादातर पैसा नकद में इकट्ठा किया गया। इसके बाद रीजनल कैश चेस्ट के जरिए इसे शेल कंपनियों और हवाला चैनलों के माध्यम से देश और विदेश में अचल और चल संपत्तियां खरीदने में लगा दिया गया।
ईडी के अनुसार सागा ग्रुप का सीएमडी और घोटाले का मुख्य कर्ताधर्ता समीर अग्रवाल देश छोड़कर भाग गया है। इससे पहले ईडी दो अलग-अलग आदेशों के तहत संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच कर चुकी है। बीते 14 जुलाई 2026 को ग्रुप के एक अहम गुर्गे रविशंकर तिवारी को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।